🌾 मूंग और उड़द की खरीफ खेती: संपूर्ण मार्गदर्शिका

🌾 मूंग और उड़द की खरीफ खेती: संपूर्ण मार्गदर्शिका

मूंग और उड़द (काली दाल) भारतीय कृषि में महत्वपूर्ण दलहनी फसलें हैं। ये फसलें न केवल मिट्टी की उर्वरता बढ़ाती हैं, बल्कि किसानों को कम समय में अच्छा लाभ भी प्रदान करती हैं। आइए जानें इनकी सफल खेती के लिए आवश्यक तकनीकों के बारे में।


🌱 भूमि का चयन और तैयारी

  • मध्यम से भारी दोमट मिट्टी जिसमें जल निकासी अच्छी हो, सर्वोत्तम होती है।
  • क्षारीय, जलभराव वाली या बहुत हल्की मिट्टी से बचें।
  • खरीफ फसल के लिए, पिछली फसल की कटाई के बाद गहरी जुताई करें।
  • पहली बारिश के बाद मिट्टी को भुरभुरी बनाने के लिए 2-3 बार जुताई करें।
  • अंतिम जुताई से पहले प्रति हेक्टेयर 15-20 गाड़ी अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद मिलाएं।

📅 बुवाई का समय

  • मूंग और उड़द की बुवाई मानसून की पहली अच्छी बारिश के बाद करें।
  • खरीफ मौसम में बुवाई का आदर्श समय जून के अंतिम सप्ताह से जुलाई के पहले सप्ताह तक है।
  • 7 जुलाई के बाद बुवाई से उत्पादन में कमी आ सकती है।

🌾 बीज दर और बुवाई की विधि

  • बीज दर: प्रति हेक्टेयर 12-15 किलोग्राम।
  • पंक्ति से पंक्ति की दूरी: 30 सेमी।
  • पौधे से पौधे की दूरी: 10 सेमी।
  • बुवाई की गहराई: 4-6 सेमी।
  • बुवाई विधि: सीड ड्रिल या कूड़ (पोर) विधि का उपयोग करें।

🧪 बीज उपचार

  • बीज को बुवाई से पहले फफूंदनाशक जैसे कार्बेन्डाजिम 2 ग्राम और थायरम 2 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज के साथ उपचारित करें।
  • इसके बाद, राइजोबियम और फॉस्फेट घुलनशील बैक्टीरिया (PSB) 25 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज के साथ उपचारित करें।
  • बीज को छाया में सुखाकर तुरंत बुवाई करें।

🌿 खाद प्रबंधन

  • बुवाई के समय प्रति हेक्टेयर 20-25 किलोग्राम नाइट्रोजन, 40-50 किलोग्राम फॉस्फोरस और 20-25 किलोग्राम पोटाश दें।
  • उदाहरण: प्रति एकड़ 25 किलोग्राम यूरिया और 125 किलोग्राम सिंगल सुपर फॉस्फेट (SSP) या 50 किलोग्राम DAP दें।
  • जिंक सल्फेट: 4-6 किलोग्राम प्रति एकड़।
  • गंधक की कमी होने पर 20-25 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर दें।

💧 सिंचाई प्रबंधन

  • मूंग और उड़द मुख्यतः वर्षा पर निर्भर फसलें हैं।
  • फूल आने और फली बनने के समय हल्की सिंचाई आवश्यक है।
  • अत्यधिक सिंचाई से बचें, इससे रोगों का खतरा बढ़ता है।

🌾 खरपतवार नियंत्रण

  • बुवाई के समय या तुरंत बाद पेंडीमेथालिन 30% की 1 लीटर प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करें।
  • 15-20 दिनों के बाद आवश्यकतानुसार खरपतवारनाशक का उपयोग करें।

🦟 कीट और रोग नियंत्रण

  • पीला मोज़ेक वायरस: प्रतिरोधी किस्मों का चयन करें और संक्रमित पौधों को नष्ट करें।
  • थ्रिप्स और एफिड्स: इमिडाक्लोप्रिड या थायमेथोक्साम का छिड़काव करें।

🧺 कटाई और उपज

  • फसल बुवाई के 60-70 दिनों बाद कटाई के लिए तैयार होती है।
  • जब फलियाँ पीली होकर सूखने लगें, तब कटाई करें।
  • औसत उपज: 4-5 क्विंटल प्रति एकड़।

🤝 निष्कर्ष

मूंग और उड़द की खरीफ खेती किसानों के लिए कम समय में अधिक लाभ देने वाली फसलें हैं। सही समय पर बुवाई, उचित बीज उपचार, संतुलित खाद प्रबंधन और सिंचाई से इन फसलों की उपज में वृद्धि की जा सकती है।

यदि आपके पास मूंग और उड़द की खेती से संबंधित कोई प्रश्न हैं, तो कृपया टिप्पणी करें।

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